वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (18 मई) को कहा कि उत्तर कोरिया के साथ निर्धारित शिखर वार्ता ना होने पर अमेरिका अगला कदम उठाएगा साथ ही उन्होंने दोनों नेताओं के बीच होने वाली ऐतिहासिक वार्ता पर प्योंगयांग के रुख बदलने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया. सिंगापुर में ट्रंप और किम के बीच होने वाली शिखर वार्ता पर अब भी संदेह के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि उत्तर कोरिया ने मंगलवार (15 मई) को अमेरिका पर एकतरफा परमाणु निरस्त्रीकरण का आरोप लगाते हुए 12 जून को होने वाली वार्ता से पीछे हटने की धमकी दी थी.
प्योंगयांग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य अभ्यासों पर भी आपत्ति जतायी है. ट्रंप ने ओवल कार्यालय में पत्रकारों से कहा, ‘‘हम देखेंगे की क्या होता है. अगर बैठक हुई तो हुई.. और अगर नहीं हुई तो हम अगला कदम उठाएंगे.’’ किम को तसल्ली देने के लिए ट्रंप ने उसे सत्ता में रहने के लिए परमाणु हथियार त्यागने का प्रस्ताव दिया साथ ही धमकी भी दी थी कि कूटनीति विफल होने पर लीबिया जैसे हालात पैदा हो सकते हैं और उत्तर कोरियाई नेता का वहीं हश्र हो सकता है जैसा मुअम्मार अल-गद्दाफी का हुआ था. गद्दाफी को सत्ता से हटा उसकी हत्या कर दी गई थी.
वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के अधिकारियों को ‘‘अज्ञानी और अक्षम’’ बताते हुए गुरुवार (17 मई) कहा कि मौजूदा स्थिति में वह सोल के साथ वार्ता नहीं करेगा. एक दिन पहले ही दोनों कोरियाई देशों के बीच वार्ता रद्द कर दी गयी थी. दोनों देशों के बीच बुधवार (16 मई) को उच्च स्तरीय बैठक होने वाली थी, लेकिन अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास के कारण उत्तर कोरिया वार्ता से पीछे हट गया.
केसीएनए समाचार एजेंसी ने शीर्ष वार्ताकार री सोन ग्वान के हवाले से कहा, ‘‘जब तक उत्तर-दक्षिण कोरिया के बीच उच्च स्तरीय वार्ता रोकने के लिए बनी गंभीर स्थिति का समाधान नहीं होता तब तक दक्षिण कोरिया के मौजूदा शासन के साथ आमने-सामने बैठना आसान नहीं होगा.’’
Source:-Zeenews
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प्योंगयांग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य अभ्यासों पर भी आपत्ति जतायी है. ट्रंप ने ओवल कार्यालय में पत्रकारों से कहा, ‘‘हम देखेंगे की क्या होता है. अगर बैठक हुई तो हुई.. और अगर नहीं हुई तो हम अगला कदम उठाएंगे.’’ किम को तसल्ली देने के लिए ट्रंप ने उसे सत्ता में रहने के लिए परमाणु हथियार त्यागने का प्रस्ताव दिया साथ ही धमकी भी दी थी कि कूटनीति विफल होने पर लीबिया जैसे हालात पैदा हो सकते हैं और उत्तर कोरियाई नेता का वहीं हश्र हो सकता है जैसा मुअम्मार अल-गद्दाफी का हुआ था. गद्दाफी को सत्ता से हटा उसकी हत्या कर दी गई थी.
वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के अधिकारियों को ‘‘अज्ञानी और अक्षम’’ बताते हुए गुरुवार (17 मई) कहा कि मौजूदा स्थिति में वह सोल के साथ वार्ता नहीं करेगा. एक दिन पहले ही दोनों कोरियाई देशों के बीच वार्ता रद्द कर दी गयी थी. दोनों देशों के बीच बुधवार (16 मई) को उच्च स्तरीय बैठक होने वाली थी, लेकिन अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास के कारण उत्तर कोरिया वार्ता से पीछे हट गया.
केसीएनए समाचार एजेंसी ने शीर्ष वार्ताकार री सोन ग्वान के हवाले से कहा, ‘‘जब तक उत्तर-दक्षिण कोरिया के बीच उच्च स्तरीय वार्ता रोकने के लिए बनी गंभीर स्थिति का समाधान नहीं होता तब तक दक्षिण कोरिया के मौजूदा शासन के साथ आमने-सामने बैठना आसान नहीं होगा.’’
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