Thursday, 19 April 2018

SBI ने भी माना- कैशलेस सोसाइटी की मुहिम फेल होने से पैदा हुआ कैश क्रंच

कैश की किल्लत को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक लगातार कह रहा है कि देश में कैश की कोई कमी नहीं है. एटीएम से कैश गायब होने के लिए तकनीकी वजहों को जिम्मेदार बताया जा रहा है, लेक‍िन एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट इन दावों की हकीकत बयां करती है. रिपोर्ट के मुता‍बिक देश में जितनी कैश की आवक होनी चाहिए थी, उतनी नहीं हुई है. इसमें 70 हजार करोड़ रुपये की अभी कमी है.  एसबीआई ने कहा है कि कैशलेस लेनदेन घटने की वजह से यह स्थ‍िति पैदा हुई है.

एसबीआई रिपोर्ट का यह आंकड़ा सरकार के आंकड़े से काफी अलग है. केंद्र सरकार ने कैश की किल्लत की वजहों को गिनाते हुए कहा था कि इकोनॉमी में सिर्फ 25 हजार करोड़ रुपये की नगदी की कमी है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2018 की दूसरी छमाही में एटीएम से डेबिट कार्ड  के जरिये 15,291,00 करोड़ रुपये विद्ड्रॉ किए जाने का अनुमान है. यह पिछले छह महीनों के मुकाबले 12.2 फीसदी ज्यादा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 9.8 फीसदी तक रहा है, तो सर्कुलेशन में मार्च 2018 तक करंसी की मौजूदगी 19.4 खरब होनी चाहिए थी. हालांकि असल में यह 17.5 खरब रुपये थी. हालांकि एसबीआई ने इसके साथ ही कहा है कि 1.9 खरब रुपये की कमी को कमी नहीं कहा जा सकता है.

एसबीआई ने कहा है मौजूदा समय में जो कैश की किल्लत महससू हो रही है. उसके लिए 200 रुपये के नोटों की छपाई में तेजी लाना जिम्मेदार हो सकती है. इसकी वजह से छोटे नोटों की मांग में बदलाव हुआ होगा और बड़े नोटों की जरूरत को पूरा करने के लिए इनका यूज बढ़ा होगा. इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि एटीएम को समय-समय पर रिफ‍िल करना होता है. इस वजह से भी कैश की किल्लत की दिक्कत थोड़ी बढ़ने का अनुमान है.


Source:-Aajtak

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